जो बनना चाहते है IAS – IPS – IRS, उन्हे मैं दूंगी विशेष निशुल्क: क्लॉस महीने मे दो बार : प्रिता हरित

जो बनना चाहते है IAS – IPS – IRS,  उन्हे मैं दूंगी विशेष निशुल्क: क्लॉस महीने मे दो बार… पोस्ट पढ़ते ही SHARE करें…
पूरे देश के बहुजन समाज के युवाओं के लिये
बहुजन समाज के युवा चपरासी/क्लर्क या सिपाही की नौकरी के ख्वाब देखना छोड़ IAS- IPS – IRS- IFS बने…
मैं प्रीता हरित IRS  दिल से चाहती हूं कि देश के बहुजन समाज के  युवा छोटा काम और छोटी सोच का त्याग कर कडी़ मेहनत कर सिविल सेवा की परीक्षा की तैयारी कर, चयनित हो देश के नौकरशाह बने!
मैंने 21 साल की उम्र मे ही पहले प्रयास मे सिविल सेवा की परीक्षा पास की और जनरल लिस्ट मे मेरा नाम आया, कुल मिलाकर तीन बार सिविल सेवा पास की, तीन बार IPS की नौकरी छोडी, और IRS बनी रही, इसके अलावा 8 उच्च नौकरिया और छोडी. कुल मिलाकर 11 बार क्वालिफॉई किया, 10 नौकरिया छोडी़…मैं कर सकती हूं, तो आप क्यों नही, मैं बेहद गरीब घर से थी!
बचपन से ही अंग्रेजी अपनाएं, देश दुनिया, शासन, प्रशासन, अर्थशास्त्र, राजनीति, इतिहास, भूगोल की जानकारी रखे, NCRT की किताबो को पढे़, अखबार पढे़, न्यूज सुने, 8वीं कक्षा से ही, सिविल सेवा की परीक्षा की तैयारी शुरू करें!
इस हेतू मैं, प्रीता हरित IRS सिविल सेवा मे जाने के इच्छुक युवाओं को विशेष क्लॉस दूंगी. जो हर महीने मे दो बार देश की राजधानी दिल्ली मे होगी!
इच्छुक युवा शामिल होने के लिये अपना नाम, मोबाईल नम्बर, जिला, और शिक्षा 9015631082 पर SMS करें, फिर आपको SMS द्वारा ही, क्लॉस की तारीख, समय व स्थान की सूचना दी जायेगी!
मैं कर रही हूं भरसक प्रयास बहुजन समाज के उत्थान के लिये!
इस मुहिम से जुडे़, और इस संदेश को बहुजन समाज के प्रत्येक व्यक्ति तक पहुंचाये!
प्रीता हरित IRS
इनकम टैक्स कमिशनर
राष्ट्रीय अध्यक्ष
बहुजन सम्यक संगठन

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भारत के आम नागरिक व खास तोर पर हरियाणा की जनता से हाथ जोड़ कर प्रार्थना है की इस लेख को जरुर पढ़े

भारत के आम नागरिक व खास तोर पर हरियाणा की जनता से हाथ जोड़ कर प्रार्थना है की इस लेख को जरुर पढ़े

सतलोक एक्सप्रेस न्यूज 

1. मूझै कोई ऐसा प्रमाणित विडियो दिखा दो जिसमै संत रामपाल जी 
#_दूध व #_खीर सै नहा रहै हो???? 
2:-व ऐसी किसी माता बहन का नाम व पता बता तो जिसका गर्भपात कराया #_सतलोक आश्रम मै??? …
.. मै आप सबको वादा करता हू आपसे क्षमा मांग कर छौड दूंगा #_संतरामपाल जी को ।।। 
.. :-अन्यथा आप सब को #_संत रामपाल जी से माफी मागनी पडैगी नही तो पुछो इन धर्म के ठेकेदारों व भ्रष्ट मिडीया ओर हरियाणा सरकार से जिसने ये दोगले धर्म के ठेकेदारों के सथा मिल कर एक सच्चे संत के साथ ये कहर किया
ओर हम संत रामपाल दी के अनुयाई कोई अनपढ गंवार नही हू,, जौ ऐसै किसी नकली के चंगूल मै फंस जाएं
हरियाणा में संत रामपाल जी पर ऐसे आरोप लगाए भ्रष्ट मिडीया ने जिससे सूनकर भारत के नागरिक सत्य समझने लगे।।
लैकिन बहुत कम लोग जानते यै सब बकवास है।।
1:_-#_संतरामपाल जी खीर से नहाते थे ?
….. खीर महिने मै दो बार बनती है तो कया बाकि के 28दिन संतरामपाल जी कया नहाते नही थे।
।।
सब बकवास फैलायी गयी
मैनै 8 साल मै वहा ऐसा नही दैखा।।
।।
जहा दूघ सै खीर बनती वहा सै 500सै600फूट दूर रहतेगूरू जी।।
मैने अपनै हाथो सै वहा थैलिया खाली की है सीधी खीर बनती ओर भकतो को भोजन मे मिलती थी ।
2:_-#_संतरामपाल जी घी से नहाते??
:-बकवास यै भी??
3:_-#_आश्रम मै गर्भपात होता था?
…. तो भाई नयूज दिखाने वालो उस बहन माता का नाम व पता बता दो जनता को???
 कयू मूरख बनातै जनता को!!!
सत्य जानने के लिएआप दुसरों की सुनी सुनाई बातो में ना आकर एकबार साधना चेनल पर 7:40 से840पर व 9:30 से 10:30तक फास्ट न्यूज पर ओर सुबह 6बजे से7बजे तक हरियाणा न्यूज पर संत रामपाल जी के मंगल प्रवचन सुने व स्वंम निर्णय ले की सच कया है अगर आप सुनी सुनाई बात पर पर विश्वास करते है तो आप को कुछ कहने का अधिकार नही है
कबीर साहेब कहते हैं कथनी तच करनी कथे अग्यानी दिन रात कुकर ( कुत्ता) जो भोक्ता सुनी सुनाई बात
सत साहेब जी

इंजीनियर दुल्हन और वायुसैनिक दूल्हा, महज 16 मिनट में हुई ये शादी

सतलोक एकस प्रेस न्यूज , मन्डी आदमपुर 

महज 16 मिनट में हुई बेहद अनोखी शादी। न दहेज, न बैंडबाजा और न बजी शहनाई। दूल्हा आया, खाना भी नहीं खाया और मिनटों में दुल्हन ले गया। देखिए..



ये अनोखी शादी हुई थी हरियाणा के मंडी आदमपुर में। शादियों में जहां धूम धड़ाका और चमक-धमक कर लाखों खर्च करते हैं, वहीं बालसमंद गांव में महज 15 मिनट में आदर्श विवाह हुआ।
इस विवाह में ना बैंडबाजा, ना घोड़ी, ना ही दूल्हा-दुल्हन के सिर पर कोई सेहरा था और ना ही कोई नाच-गाना हुआ। यह आदर्श विवाह गांव बालसंमद में रविवार को कबीर पंथी से संपन्न कराया गया था।



सामाजिक रीति-रिवाज से परे दहेज रहित इस अनोखी शादी में दुल्हन साधारण कपड़ों में ही ससुराल के लिए विदा हुई। गांव बालसमंद निवासी सतबीर सिंह की बेटी सरोज की शादी जींद जिले के गांव डबलान निवासी तेलूराम के बेटे दीपक के साथ हुई थी।



दूल्हा दीपक वायुसेना में तैनात है तो दुल्हन सरोज सोनीपत स्थित महिला विश्वविद्यालय खानपुर से बीटेक टॉपर रही है। दहेज के लोभियों को ठेंगा दिखाती इस शादी में बारात के रूप में दूल्हे के 5-6 परिजन ही शरीक हुए और मात्र 15 मिनट में विवाह संपन्न हुआ था। नवदंपति ने संत कबीर के चित्र के सामने एक-दूसरे के साथ जीवन बिताने का संकल्प लिया।



इस अनोखी आदर्श शादी में रस्में भी परमात्मा की प्रार्थना कर और दूल्हा-दुल्हन को रक्षासूत्र बांधकर पूरी की गई। इसके बाद दूल्हा-दुल्हन के साथ मौजूद सभी लोग हाथ जोड़कर एक सुर में रमेणी (गुरुवाणी) के दौरान चौपाइयां दोहराते नजर आए। रमेणी के साथ ही यह विवाह संपन्न हो गया था। शादी में दोनों पक्षों के तमाम रिश्तेदार तो शामिल हुए ही, वहीं कबीर पंथ को मानने वाले कई भक्त दूर-दूर से आए हुए थे।




  1. शादी में शामिल लोगों को मीठे पकवान की बजाय उन्हें सादा भोजन परोसा गया। ग्रामीणों के मुताबिक आज के दौर में शादियों में दहेज का चलन बढ़ रहा है। इस बुराई को दूर करना चाहिए। उन्होंने कहा कि व्यर्थ के आडंबरों से दूर रहकर सादगीपूर्ण विवाह रचाने में उन्हें आत्मीय खुशी मिली।

सुप्रीम कोर्ट से भी सरकार की याचिका खारिज

No automatic alt text available.
सतलोक एक्स्प्रेस् न्यूज़- नई दिल्ली
दिनाक- 06 जनवरी 2017
सुप्रीम कोर्ट से भी सरकार की याचिका खारिज. भक्त रामअवतार राणा की जमानत याचिका खारिज करने के लिए दायर की थी याचिका. 2014 में बरवाला की घटना के दौरान सरकार ने बनाए थे झूठे केस.
गोरतलब है की रामअवतार जी को लगभग एक साल जेल मे रहने के बाद पंजाब हरियाणा हाइकोर्ट से जमानत मिली थी
.

सुप्रीम कोर्ट से भी सरकार की याचिका खारिज

सुप्रीम कोर्ट से भी सरकार की याचिका खारिज

No automatic alt text available.
सतलोक एक्स्प्रेस् न्यूज़- नई दिल्ली
दिनाक- 06 जनवरी 2017
सुप्रीम कोर्ट से भी सरकार की याचिका खारिज. भक्त रामअवतार राणा की जमानत याचिका खारिज करने के लिए दायर की थी याचिका. 2014 में बरवाला की घटना के दौरान सरकार ने बनाए थे झूठे केस.
गोरतलब है की रामअवतार जी को लगभग एक साल जेल मे रहने के बाद पंजाब हरियाणा हाइकोर्ट से जमानत मिली थी
.

अवश्य पढे , पर्भु प्रेमी आत्माऐ परदेश(काललोक) से स्वदेश(अमरलोक) लौटने की सडक(विधि)

अवश्य पढे , पर्भु प्रेमी आत्माऐ
परदेश(काललोक) से स्वदेश(अमरलोक) लौटने की सडक(विधि)

घीसादास जी कहते है मूल कमल से सीधी सडक जात है सतनाम(ओम + तत) ले जा उडा कर…
जैसे हमे अपने घर से दूसरे देश जाना हो तो पहले बस या कार से by सडक airport जायेगे उसके बाद हम बस कार से नही जा सकते फिर हमे airport से हवाई जहाज से उडकर जाना पडेगा..


ठीक इसी तरह मूल कमल से त्रिकुटी तक सीधी सडक जाती है गुरू जी का प्रथम मंत्र समझो बस कार जो हमे त्रिकुटी तक लेकर जायेगा.. त्रिकुटी हवाई अडडा समझो.. त्रिकुटी से आगे हमे सतनाम का मंत्र उडाकर लेकर जायेगा.. सतनाम के दो अक्षर को हवाई जहाज समझो.. ( नाम की नौका ही भवसागर से पार करती है)
विशेष जानकारी->
नोट – हमारा शरीर एक ब्रह्मांड का नक्शा है जो कुछ एक ब्रह्मांड मे है वो हम शरीर मे भी देख सकते है जैसे internet पर आप कुछ भी देख सकते हो इसी तरह परमात्मा की पावर से हम ब्रह्मांड को इस शरीर मे देख सकते है संत कमल बोलते है योगी चक्र बोलते है ये कमल चक्र इन देवताओ के आवास स्थल है जहा ये रहते है ये ब्रह्मांड मे ही है ये समझ लो हमारा शरीर मिनी ब्रह्मांड है ये देवता कमल के अन्दर हमारे शरीर मे भी विधमान है..

विस्तार से – संत रामपाल जी महाराज के तीन बार मे नामदान देते है प्रथम नाम , दूसरा नाम, तीसरा नाम (सारनाम)… अब जानिये तीनो मंत्रो का महत्व
प्रथम नाम का महत्व======
ये ब्रह्मांड सात कमलो(चक्रो) मे बांटा हुआ है और हर कमल मे एक एक देवी देवता को प्रधान बना रखा है..
 मूल कमल ——–
मूल कमल से सीधी सडक त्रिकुटी तक जाती है.. जब साधक की भक्ति पूरी हो जाती है तो कबीर परमेश्वर एक विमान लेकर गुरू रूप मे आते है..
(नोट – हमारी आत्मा पर पांच शरीर चढे हुए है स्थूल, सूक्ष्म ,कारण, महाकारण, कैवल्य शरीर..)
हम 5 तत्व के स्थूल शरीर को छोडकर सूक्षम शरीर मे आ जाते है तब हमारा विमान पहले मूल कमल से गुजरता है वहा गणेश जी विधमान है हम गंणेश के मंत्र की कमाई उनको देकर उनके कर्ज से मुक्त हो जायेगे..
फिर गंणेश जी हमे आगे जाने की अनुमति देगे…


स्वाद कमल——
फिर हम स्वाद कमल मे प्रवेश कर जायेगे यहा के प्रधान ब्रह्मा और सवित्री है.. हम ब्रह्मा सवित्री के मंत्र की कमाई इनको देकर कर्ज चुका देगे.. क्योकि ब्रह्मा हमारी उत्पति कर्ता है.. इसके बाद ब्रह्मा जी हमे आगे जाने की अनुमति हमे देगे..
नाभी कमल——
फिर हम नाभी कमल मे प्रवेश कर जायेगे नाभी कमल मे विष्णु लक्ष्मी प्रधान है हम इनके मंत्र की कमाई इनको देकर कर्ज चुका देगे.. क्योकि विष्णु पालन पोषण कर्ता है. फिर विष्णु जी हमारे विमान को आगे जाने की अनुमति देगे..
हदय कमल—–
फिर हम हदय कमल मे प्रवेश कर जायेगे. यहा के प्रधान शिव पार्वती है इनके मंत्र की कमाई इनको देकर इनका कर्ज चुका देगे.. क्योकि शिव संहार करते है.. फिर शिव हमारे विमान को आगे जाने की अनुमति द्गे.
कंठ कमल—–
फिर हम कंठ कमल मे प्रवेश कर जायेगे.. यहा की प्रधान दुर्गा माता है हम दुर्गा माता के मंत्र की कमाई दुर्गा माता को देकर इसका कर्ज चुका देगे.. फिर दुर्गा माता हमे आगे जाने की अनुमति देगी..
त्रिकुटी कमल—–
फिर हम त्रिकुटी कमल दसवे द्वार मे प्रवेश कर जायेगे… दसवे द्वार मे आगे चलकर त्रिवेणी आती है.. तीन रास्ते हो जाते है.. ये हवाई अडडा समझो प्रथम मंत्र हमे यहा तक लाकर छोड देते है. इससे आगे सतनाम के दो अक्षर उडाकर लेकर जाते है..

दूसरा नाम( सतनाम) का महत्व
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त्रिकुटी मे आगे चलकर तीन रास्ते हो जाते है जिसे त्रिवेणी बोलते है.. वहा काल के पुजारी दायं बाय चले जाते है.. लेकिन सामने जो रास्ता होता है उसको ब्रह्मरंद( बज्रकपाट) बोलते है.. वह अमरलोक जाने का रास्ता है.. कबीर परमात्मा कहते है शिव ने भी 97 बार try किया था.. लेकिन वो भी इस गेट को नही खोल पाये थे.. वो भी उल्टे हट गये थे क्योकि शिव के पास सतनाम मंत्र नही है..
गरीब- ब्रह्मरंद को खोलत है कोई एक
द्वारे से फिर जात है ऐसे बहुत अनेक
इस ब्रह्मरंद के बज्रकपाट को सतनाम के दो अक्षर खोलते है तब हम दसवे द्वार मे आगे सहंसार कमल मे प्रवेश करते है.. (यहा से ब्रह्मा विष्णु शिव के पिता काल की सीमा शुरू होती है.. जहा पर काल अपने भयानक वास्तविक रूप मे बैठा है) आगे बहुत भयानक आवाजे आती है डाकनी शाकनी बहुत सारी मिलती है.. सतनाम के मंत्र को सुनकर सब भाग जाते है.. (सतनाम मे इतनी पावर है अगर 12 करोड यम के दूत और साथ मे ब्रह्मा विष्णु शिव का पिता काल ये सभी एक साथ आ जाये मात्र एक जाप सबको उठाकर फैक देगा) आगे चलकर काल अपने वास्तविक रूप मे बैठा नजर आता है लेकिन गुरू रूप मे परमात्मा साथ होते है.. तब हमे तीनो मंत्रो का जाप एक साथ करना होता है..
 तीसरे नाम (सारनाम) का महत्व
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(सतनाम के बाद जब हम तीसरा सारनाम गुरू जी से लेते है तो गुरू जी सतनाम के दो अक्षर मे ही सारनाम का एक अक्षर एड कर देते है ऐसे ब्रह्म परब्रह्म पूर्णब्रह्म तीनो का जाप एक साथ करना होता है.. जाप विधि गुरू जी बताते है गीता अध्याय 17 के 23 मे लिखा है ओम- तत- सत ये पूर्ण परमात्मा का मंत्र(नाम) कहा है ओम सीधा ही है तत सत कोड वर्ड है सतगुरू रामपाल जी महाराज बतायेगे.. फिर इन तीनो मंत्र का एक साथ जाप करना होता है सतनाम और सारनाम एक नाम बन जाता है)
जब हम दसवे द्वार के last मे जाते है तो वहा काल वास्तविक रूप मे बैठा है.. वहा हम जब इन तीनो मंत्रो (सतनाम और सारनाम)का जाप एक साथ करते है तो काल निरंजन सर झुका देता है गीता 8/13 श्लोक मे ओम मंत्र काल ब्रह्म का है इसकी कमाई काल अपने पास रख लेता है और हमे आगे आठवे कमल ग्यारहवे द्वार मे जाने की अनुमति दे देता है. इसके सर के पीछे ग्यारहवा द्वार है. जब काल सर झुकाता है तो हम इसके सर पर पैर रख कर ग्यारहवे द्वार परब्रह्म के लोक आठवे कमल मे प्रवेश कर जाते है वहा हमारा सूक्ष्म शरीर छुट जाता है हमारे पास तत और सत मंत्र की कमाई शेष रह जाती है जब हम परब्रह्म(अक्षरपुरूष) के लोक मे आगे बढते जाते है हमारी तत मंत्र की कमाई परब्रह्म रख लेता है क्योकि तत मंत्र परब्रह्म का है और हमे आगे जाने की अनुमति दे देता है. हमारे कारण महाकारण शरीर छुट जाते है केवल कैवल्य शरीर शेष रह जाता है (नौवे कमल मे बारहरवा द्वार पार करके अमरलोक है) ग्यारहवा द्वार के last मे भव्वर गुफा आती है वहा पर मानसरोवर बना है वहा से अमरलोक दिखाई देने लगता है वहा परमात्मा इस आत्मा को मानसरोवर मे स्नान करवाते है तब इस आत्मा का कैवल्य शरीर छुट जाता है और वास्तविक नूरी रूप बन जाता है तब वहा इस आत्मा के शरीर का प्रकाश सोलह सुरज और चंद्रमा जितना हो जाता है.. फिर सत मतलब सारनाम मंत्र की कमाई लेकर ये आत्मा सतलोक मतलब अमरलोक मे प्रवेश कर जाती है.. वहा सदा के लिए स्थाई हो जाती है.. मौज मनाती है नाचती गाती है परमात्मा कबीर साहेब के रोज दर्शन करती है.. इस तरह से ये आत्मा काल के जाल से निकलकर अपने घर अपने वतन अमरलोक लौट आती है.. फिर कभी काल के लोक मे वापिस नही आती.. सदा के लिए अमर और स्थाई हो जाती है.. सदा के लिए जन्म मरन से पीछा छुट जाता है.. फोटो मे लिखी कबीर सागर की अमरलोक की कबीर वाणी पढिये.. वहा जन्म मरण बुढापा नही होता सदा युवा रहती है आत्मा.. अमरलोक मे भी नर नारी है परिवार है. लेकिन शब्द शक्ति से बच्चे पैदा होते है गर्भ से नही होते.. वहा कोई कर्म नही करना पडता.. अमरलोक मे बाग बगीचे है फल फूल नदी मानसरोवर है लेकिन सब कुछ नूरी है हिरे की तरह स्वय प्रकासित.. वहा सभी प्रेम से रहते है.. कोई किसी को जरा भी बुरा नही बोलता..
सत साहेब जैसा इस दास ने गुरू जी के ज्ञान को समझा वैसा बता दिया कोई गलती हो तो गुरू जी क्षमा करना.. अज्ञानी जीव हु..
अमरलोक कबीर परमेश्वर की वाणी मे
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चल देखो देश हमारा रे, जहाँ कोटि पदम उजियारा रे, 🏃
🏃 देखो देश हमारा रे,जहाँ उजल भँवर गुंजारा रे, 🏃
चल देखो देश हमारा रे, जहाँ चवंर सुहगंम डारा रे, 🏃
चल देखो देश हमारा रे, जहाँ चन्द्र सूरज नहीं तारा रे, 🏃
चल देखो देश हमारा रे, नहीं धर अम्बर कैनारा रे,🌎 🏃
चल देखो देश हमारा रे, जहाँ अनन्त फूल गुलजारा रे, 🏃
चल देखो देश हमारा रे, जहाँ भाटी चवै कलारा रे, 🏃
चल देखो देश हमारा रे, जहाँ धूमत है मतवारा रे,🚁
रे मन कीजै दारमदारा रे तुझे ले छोडूं दरबारा रे,
फिर वापिस ना ही आवे रे सतगुरु सब नाँच मिटावै रे, 🏃
चल अजब नगर विश्रामा रे, तुम छोड़ो देना बाना रे, 🏃
चल देखो देश अमानी रे, जहाँ कुछ पावक ना पानीरे,🚣 🏃
चल देखो देश अमानी रे, जहाँ झलकै बारा बानी रे, 🏃
चल अक्षर धाम चलाऊं रे, मैं अवगत पंथ लखाऊं रे,
कर मकरतार पियाना रे, क्यों शब्दै शब्द समाना रे,🌞 🌳
जहाँ झिलझिल दरिया नागर रे, जहाँ हंस रहे सुखसागर रे, जहाँ अनहद नाद बजन्ता रे, जहाँ कुछ आदि नहीं अन्ता रे,💥 🌿जहाँ अजब हिरम्बर हीरा रे,त जहाँ हंस रहे सुख तीरा रे, 🌲जहाँ अजब हिरम्बर हीरा रे, जहाँ यम दण्ड नहीं दुख पीडा रे ..आदरणीय गरीब दासजी महाराज परमेश्वर कबीर साहिब जी को सतलोक में आँखों देख कर बता रहे हैं
🏃चल देखो देश अमानी रे मैं तो सतगुरु पर कुर्बानी रे, 🏃चल देखो देश बिलन्दा रे, जहाँ बसे कबीरा जिन्दा रे,🌳 🏃चल देखो देश अगाहा रे, जहाँ बसे कबीर जुलाहा रे🏤 🏃चल देखो देश अमोली रे, जहाँ बसे कबीरा कोली रे 🏃
चल देखो देश अमाना रे, जहाँ बुने कबीरा ताना रे,🏇 🏃
चल अवगत नगर निबासा रे, जहाँ नहीं मन माया का बासा रे 🏃चल देखो देश अगाहा रे, जह बसै कबीर जुलाहा रे.. .
हे मालिक आपके चरणों में कोटि कोटि दण्डवत् प्रमाण, ऐसा निर्मल ग्यान देने के लिए…
ऐसा निर्मल ग्यान है जो निर्मल करे शरीर,
और ग्यान मण्डलीक कहै ये चकवै ग्यान कबीर।
और ग्यान सब ग्यानडी कबीर ग्यान सो ग्यान,
जैसे गोला तोब का अब करता चलै मैदान।
और संत सब कूप है, केते झरिया नीर,
दादू अगम अपार है ये दरिया सत् कबीर
Plz visit – www.jagatgururampalji.org

अवश्य पढे , पर्भु प्रेमी आत्माऐ परदेश(काललोक) से स्वदेश(अमरलोक) लौटने की सडक(विधि

अवश्य पढे , पर्भु प्रेमी आत्माऐ

परदेश(काललोक) से स्वदेश(अमरलोक) लौटने की सडक(विधि)

घीसादास जी कहते है मूल कमल से सीधी सडक जात है सतनाम(ओम + तत) ले जा उडा कर…
जैसे हमे अपने घर से दूसरे देश जाना हो तो पहले बस या कार से by सडक airport जायेगे उसके बाद हम बस कार से नही जा सकते फिर हमे airport से हवाई जहाज से उडकर जाना पडेगा..


ठीक इसी तरह मूल कमल से त्रिकुटी तक सीधी सडक जाती है गुरू जी का प्रथम मंत्र समझो बस कार जो हमे त्रिकुटी तक लेकर जायेगा.. त्रिकुटी हवाई अडडा समझो.. त्रिकुटी से आगे हमे सतनाम का मंत्र उडाकर लेकर जायेगा.. सतनाम के दो अक्षर को हवाई जहाज समझो.. ( नाम की नौका ही भवसागर से पार करती है)
विशेष जानकारी->
नोट – हमारा शरीर एक ब्रह्मांड का नक्शा है जो कुछ एक ब्रह्मांड मे है वो हम शरीर मे भी देख सकते है जैसे internet पर आप कुछ भी देख सकते हो इसी तरह परमात्मा की पावर से हम ब्रह्मांड को इस शरीर मे देख सकते है संत कमल बोलते है योगी चक्र बोलते है ये कमल चक्र इन देवताओ के आवास स्थल है जहा ये रहते है ये ब्रह्मांड मे ही है ये समझ लो हमारा शरीर मिनी ब्रह्मांड है ये देवता कमल के अन्दर हमारे शरीर मे भी विधमान है..

विस्तार से – संत रामपाल जी महाराज के तीन बार मे नामदान देते है प्रथम नाम , दूसरा नाम, तीसरा नाम (सारनाम)… अब जानिये तीनो मंत्रो का महत्व
प्रथम नाम का महत्व======
ये ब्रह्मांड सात कमलो(चक्रो) मे बांटा हुआ है और हर कमल मे एक एक देवी देवता को प्रधान बना रखा है..
मूल कमल ——–
मूल कमल से सीधी सडक त्रिकुटी तक जाती है.. जब साधक की भक्ति पूरी हो जाती है तो कबीर परमेश्वर एक विमान लेकर गुरू रूप मे आते है..
(नोट – हमारी आत्मा पर पांच शरीर चढे हुए है स्थूल, सूक्ष्म ,कारण, महाकारण, कैवल्य शरीर..)
हम 5 तत्व के स्थूल शरीर को छोडकर सूक्षम शरीर मे आ जाते है तब हमारा विमान पहले मूल कमल से गुजरता है वहा गणेश जी विधमान है हम गंणेश के मंत्र की कमाई उनको देकर उनके कर्ज से मुक्त हो जायेगे..
फिर गंणेश जी हमे आगे जाने की अनुमति देगे…


स्वाद कमल——
फिर हम स्वाद कमल मे प्रवेश कर जायेगे यहा के प्रधान ब्रह्मा और सवित्री है.. हम ब्रह्मा सवित्री के मंत्र की कमाई इनको देकर कर्ज चुका देगे.. क्योकि ब्रह्मा हमारी उत्पति कर्ता है.. इसके बाद ब्रह्मा जी हमे आगे जाने की अनुमति हमे देगे..
नाभी कमल——
फिर हम नाभी कमल मे प्रवेश कर जायेगे नाभी कमल मे विष्णु लक्ष्मी प्रधान है हम इनके मंत्र की कमाई इनको देकर कर्ज चुका देगे.. क्योकि विष्णु पालन पोषण कर्ता है. फिर विष्णु जी हमारे विमान को आगे जाने की अनुमति देगे..
हदय कमल—–
फिर हम हदय कमल मे प्रवेश कर जायेगे. यहा के प्रधान शिव पार्वती है इनके मंत्र की कमाई इनको देकर इनका कर्ज चुका देगे.. क्योकि शिव संहार करते है.. फिर शिव हमारे विमान को आगे जाने की अनुमति द्गे.
कंठ कमल—–
फिर हम कंठ कमल मे प्रवेश कर जायेगे.. यहा की प्रधान दुर्गा माता है हम दुर्गा माता के मंत्र की कमाई दुर्गा माता को देकर इसका कर्ज चुका देगे.. फिर दुर्गा माता हमे आगे जाने की अनुमति देगी..
त्रिकुटी कमल—–
फिर हम त्रिकुटी कमल दसवे द्वार मे प्रवेश कर जायेगे… दसवे द्वार मे आगे चलकर त्रिवेणी आती है.. तीन रास्ते हो जाते है.. ये हवाई अडडा समझो प्रथम मंत्र हमे यहा तक लाकर छोड देते है. इससे आगे सतनाम के दो अक्षर उडाकर लेकर जाते है..

दूसरा नाम( सतनाम) का महत्व
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त्रिकुटी मे आगे चलकर तीन रास्ते हो जाते है जिसे त्रिवेणी बोलते है.. वहा काल के पुजारी दायं बाय चले जाते है.. लेकिन सामने जो रास्ता होता है उसको ब्रह्मरंद( बज्रकपाट) बोलते है.. वह अमरलोक जाने का रास्ता है.. कबीर परमात्मा कहते है शिव ने भी 97 बार try किया था.. लेकिन वो भी इस गेट को नही खोल पाये थे.. वो भी उल्टे हट गये थे क्योकि शिव के पास सतनाम मंत्र नही है..
गरीब- ब्रह्मरंद को खोलत है कोई एक
द्वारे से फिर जात है ऐसे बहुत अनेक
इस ब्रह्मरंद के बज्रकपाट को सतनाम के दो अक्षर खोलते है तब हम दसवे द्वार मे आगे सहंसार कमल मे प्रवेश करते है.. (यहा से ब्रह्मा विष्णु शिव के पिता काल की सीमा शुरू होती है.. जहा पर काल अपने भयानक वास्तविक रूप मे बैठा है) आगे बहुत भयानक आवाजे आती है डाकनी शाकनी बहुत सारी मिलती है.. सतनाम के मंत्र को सुनकर सब भाग जाते है.. (सतनाम मे इतनी पावर है अगर 12 करोड यम के दूत और साथ मे ब्रह्मा विष्णु शिव का पिता काल ये सभी एक साथ आ जाये मात्र एक जाप सबको उठाकर फैक देगा) आगे चलकर काल अपने वास्तविक रूप मे बैठा नजर आता है लेकिन गुरू रूप मे परमात्मा साथ होते है.. तब हमे तीनो मंत्रो का जाप एक साथ करना होता है..
तीसरे नाम (सारनाम) का महत्व
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(सतनाम के बाद जब हम तीसरा सारनाम गुरू जी से लेते है तो गुरू जी सतनाम के दो अक्षर मे ही सारनाम का एक अक्षर एड कर देते है ऐसे ब्रह्म परब्रह्म पूर्णब्रह्म तीनो का जाप एक साथ करना होता है.. जाप विधि गुरू जी बताते है गीता अध्याय 17 के 23 मे लिखा है ओम- तत- सत ये पूर्ण परमात्मा का मंत्र(नाम) कहा है ओम सीधा ही है तत सत कोड वर्ड है सतगुरू रामपाल जी महाराज बतायेगे.. फिर इन तीनो मंत्र का एक साथ जाप करना होता है सतनाम और सारनाम एक नाम बन जाता है)
जब हम दसवे द्वार के last मे जाते है तो वहा काल वास्तविक रूप मे बैठा है.. वहा हम जब इन तीनो मंत्रो (सतनाम और सारनाम)का जाप एक साथ करते है तो काल निरंजन सर झुका देता है गीता 8/13 श्लोक मे ओम मंत्र काल ब्रह्म का है इसकी कमाई काल अपने पास रख लेता है और हमे आगे आठवे कमल ग्यारहवे द्वार मे जाने की अनुमति दे देता है. इसके सर के पीछे ग्यारहवा द्वार है. जब काल सर झुकाता है तो हम इसके सर पर पैर रख कर ग्यारहवे द्वार परब्रह्म के लोक आठवे कमल मे प्रवेश कर जाते है वहा हमारा सूक्ष्म शरीर छुट जाता है हमारे पास तत और सत मंत्र की कमाई शेष रह जाती है जब हम परब्रह्म(अक्षरपुरूष) के लोक मे आगे बढते जाते है हमारी तत मंत्र की कमाई परब्रह्म रख लेता है क्योकि तत मंत्र परब्रह्म का है और हमे आगे जाने की अनुमति दे देता है. हमारे कारण महाकारण शरीर छुट जाते है केवल कैवल्य शरीर शेष रह जाता है (नौवे कमल मे बारहरवा द्वार पार करके अमरलोक है) ग्यारहवा द्वार के last मे भव्वर गुफा आती है वहा पर मानसरोवर बना है वहा से अमरलोक दिखाई देने लगता है वहा परमात्मा इस आत्मा को मानसरोवर मे स्नान करवाते है तब इस आत्मा का कैवल्य शरीर छुट जाता है और वास्तविक नूरी रूप बन जाता है तब वहा इस आत्मा के शरीर का प्रकाश सोलह सुरज और चंद्रमा जितना हो जाता है.. फिर सत मतलब सारनाम मंत्र की कमाई लेकर ये आत्मा सतलोक मतलब अमरलोक मे प्रवेश कर जाती है.. वहा सदा के लिए स्थाई हो जाती है.. मौज मनाती है नाचती गाती है परमात्मा कबीर साहेब के रोज दर्शन करती है.. इस तरह से ये आत्मा काल के जाल से निकलकर अपने घर अपने वतन अमरलोक लौट आती है.. फिर कभी काल के लोक मे वापिस नही आती.. सदा के लिए अमर और स्थाई हो जाती है.. सदा के लिए जन्म मरन से पीछा छुट जाता है.. फोटो मे लिखी कबीर सागर की अमरलोक की कबीर वाणी पढिये.. वहा जन्म मरण बुढापा नही होता सदा युवा रहती है आत्मा.. अमरलोक मे भी नर नारी है परिवार है. लेकिन शब्द शक्ति से बच्चे पैदा होते है गर्भ से नही होते.. वहा कोई कर्म नही करना पडता.. अमरलोक मे बाग बगीचे है फल फूल नदी मानसरोवर है लेकिन सब कुछ नूरी है हिरे की तरह स्वय प्रकासित.. वहा सभी प्रेम से रहते है.. कोई किसी को जरा भी बुरा नही बोलता..
सत साहेब जैसा इस दास ने गुरू जी के ज्ञान को समझा वैसा बता दिया कोई गलती हो तो गुरू जी क्षमा करना.. अज्ञानी जीव हु..
अमरलोक कबीर परमेश्वर की वाणी मे
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चल देखो देश हमारा रे, जहाँ कोटि पदम उजियारा रे, 🏃
🏃 देखो देश हमारा रे,जहाँ उजल भँवर गुंजारा रे, 🏃
चल देखो देश हमारा रे, जहाँ चवंर सुहगंम डारा रे, 🏃
चल देखो देश हमारा रे, जहाँ चन्द्र सूरज नहीं तारा रे, 🏃
चल देखो देश हमारा रे, नहीं धर अम्बर कैनारा रे,🌎 🏃
चल देखो देश हमारा रे, जहाँ अनन्त फूल गुलजारा रे, 🏃
चल देखो देश हमारा रे, जहाँ भाटी चवै कलारा रे, 🏃
चल देखो देश हमारा रे, जहाँ धूमत है मतवारा रे,🚁
रे मन कीजै दारमदारा रे तुझे ले छोडूं दरबारा रे,
फिर वापिस ना ही आवे रे सतगुरु सब नाँच मिटावै रे, 🏃
चल अजब नगर विश्रामा रे, तुम छोड़ो देना बाना रे, 🏃
चल देखो देश अमानी रे, जहाँ कुछ पावक ना पानीरे,🚣 🏃
चल देखो देश अमानी रे, जहाँ झलकै बारा बानी रे, 🏃
चल अक्षर धाम चलाऊं रे, मैं अवगत पंथ लखाऊं रे,
कर मकरतार पियाना रे, क्यों शब्दै शब्द समाना रे,🌞 🌳
जहाँ झिलझिल दरिया नागर रे, जहाँ हंस रहे सुखसागर रे, जहाँ अनहद नाद बजन्ता रे, जहाँ कुछ आदि नहीं अन्ता रे,💥 🌿जहाँ अजब हिरम्बर हीरा रे,त जहाँ हंस रहे सुख तीरा रे, 🌲जहाँ अजब हिरम्बर हीरा रे, जहाँ यम दण्ड नहीं दुख पीडा रे ..आदरणीय गरीब दासजी महाराज परमेश्वर कबीर साहिब जी को सतलोक में आँखों देख कर बता रहे हैं
🏃चल देखो देश अमानी रे मैं तो सतगुरु पर कुर्बानी रे, 🏃चल देखो देश बिलन्दा रे, जहाँ बसे कबीरा जिन्दा रे,🌳 🏃चल देखो देश अगाहा रे, जहाँ बसे कबीर जुलाहा रे🏤 🏃चल देखो देश अमोली रे, जहाँ बसे कबीरा कोली रे 🏃
चल देखो देश अमाना रे, जहाँ बुने कबीरा ताना रे,🏇 🏃
चल अवगत नगर निबासा रे, जहाँ नहीं मन माया का बासा रे 🏃चल देखो देश अगाहा रे, जह बसै कबीर जुलाहा रे.. .
हे मालिक आपके चरणों में कोटि कोटि दण्डवत् प्रमाण, ऐसा निर्मल ग्यान देने के लिए…
ऐसा निर्मल ग्यान है जो निर्मल करे शरीर,
और ग्यान मण्डलीक कहै ये चकवै ग्यान कबीर।
और ग्यान सब ग्यानडी कबीर ग्यान सो ग्यान,
जैसे गोला तोब का अब करता चलै मैदान।
और संत सब कूप है, केते झरिया नीर,
दादू अगम अपार है ये दरिया सत् कबीर
Plz visit – www.jagatgururampalji.org

Happy New year,happy birthday,या Good morning क्यों नहीं बोलना चाहिए? आइये जानते है इस पोस्ट में

Happy New year,happy birthday,या Good morning क्यों नहीं बोलना चाहिए?

आइये अब आद्यात्मिक तरीके से इसे समझते हैं- गुड मॉर्निंग,गुड नाईट,हैपी न्यू ईयर,हैपी बर्थ डे या किसी को आशिर्वाद न देने में हमारा फायदा:-
सतयुग,द्वापर, त्रेता में हमारे पूर्वज नेक नियति से रहते थे और ज्यादातर परमात्मा से डरने वाले होते थे । इसलिए जो भी भक्ती विधि उन्हें उनके गुरुओं द्वारा बताई जाती वो उस विधि अनुसार तन मन से समय मिलते ही उसमे लगे रहते थे। क्षमा, दया,दान विवेक, सत्यवादिता ये उस समय के लोगों के आम गुण थे। ॐ नाम तक की नि:स्वार्थ भक्ति करने के कारण उनमें जुबान सिद्धि आ जाती थी।
श्राप और आशिर्वाद ये उन्ही युगों से चली परम्परा है। वो अगर किसी बीमार के सर पे हाथ रख के ये भी कह देते थे कि ‘कोई नहीं ठीक हो जायेगा’ तो वो बीमार आदमी राहत महसूस करता था। और हम आज लगभग सभी गुणों से हीन हो चुके हैं। भक्ती की बात करते ही आजकल लोग चिढ़ते हैं और हम उन युगों की परम्परा ढोह रहे हैं ।
वास्तव में आज भी बेशक हमारे पास इस जन्म की भक्ती कमाई नहीं है। लेकिन कई बार हम पिछले जन्मों की कमाई लेकर पैदा होते हैं और उसे हम किसी को गुड मॉर्निंग कह कर,आशिर्वाद दे कर और किसी को हैप्पी न्यू इयर कह कर उसको भी बाँट देते हैं।
ठीक वैसे ही जैसे किसी पानी के भरे घड़े में निचे छेद कर दिया जाये और पानी डाला ना जाये तो वो कितने दिन चलेगा।वो पिछली पूण्य कमाई खर्च होते ही हमारे बुरे दिन शूरू हो जायेंगे। विचार करें ! कि क्या हमारे हैप्पी न्यू ईयर कहने से उनका पूरा साल खुशी से गुजर जायेगा?। या
गुड मोर्निंग कहने से क्या उसकी सुबह गुड हो जाएगी?
नही, क्योंकि ये पावर तो सिर्फ और सिर्फ पूर्ण परमात्मा या उनके भेजे किसी संत के पास ही हो सकती है क्योंकि उनकी पावर खत्म नही होती।

हमें अपनी भलाई और वापिस सतलोक गमन जहां से हम सभी आये हैं वहां जाने के लिए ये पूंजी संजोकर रखनी होगी और पीढ़ी दर पीढ़ी चली आ रही परम्पराएं छोड़नी पडेगी ,सत्य साधना की खोज करनी होगी। और वो सत्य साधना आजकल बड़ी ही आसानी से उपलब्ध है। 

Happy New year,happy birthday,या Good morning क्यों नहीं बोलना चाहिए? आइये जानते है इस पोस्ट में

Happy New year,happy birthday,या Good morning क्यों नहीं बोलना चाहिए?
आइये अब आद्यात्मिक तरीके से इसे समझते हैं- गुड मॉर्निंग,गुड नाईट,हैपी न्यू ईयर,हैपी बर्थ डे या किसी को आशिर्वाद न देने में हमारा फायदा:-

सतयुग,द्वापर, त्रेता में हमारे पूर्वज नेक नियति से रहते थे और ज्यादातर परमात्मा से डरने वाले होते थे । इसलिए जो भी भक्ती विधि उन्हें उनके गुरुओं द्वारा बताई जाती वो उस विधि अनुसार तन मन से समय मिलते ही उसमे लगे रहते थे। क्षमा, दया,दान विवेक, सत्यवादिता ये उस समय के लोगों के आम गुण थे। ॐ नाम तक की नि:स्वार्थ भक्ति करने के कारण उनमें जुबान सिद्धि आ जाती थी।
श्राप और आशिर्वाद ये उन्ही युगों से चली परम्परा है। वो अगर किसी बीमार के सर पे हाथ रख के ये भी कह देते थे कि ‘कोई नहीं ठीक हो जायेगा’ तो वो बीमार आदमी राहत महसूस करता था। और हम आज लगभग सभी गुणों से हीन हो चुके हैं। भक्ती की बात करते ही आजकल लोग चिढ़ते हैं और हम उन युगों की परम्परा ढोह रहे हैं ।
वास्तव में आज भी बेशक हमारे पास इस जन्म की भक्ती कमाई नहीं है। लेकिन कई बार हम पिछले जन्मों की कमाई लेकर पैदा होते हैं और उसे हम किसी को गुड मॉर्निंग कह कर,आशिर्वाद दे कर और किसी को हैप्पी न्यू इयर कह कर उसको भी बाँट देते हैं।
ठीक वैसे ही जैसे किसी पानी के भरे घड़े में निचे छेद कर दिया जाये और पानी डाला ना जाये तो वो कितने दिन चलेगा।वो पिछली पूण्य कमाई खर्च होते ही हमारे बुरे दिन शूरू हो जायेंगे। विचार करें ! कि क्या हमारे हैप्पी न्यू ईयर कहने से उनका पूरा साल खुशी से गुजर जायेगा?। या
गुड मोर्निंग कहने से क्या उसकी सुबह गुड हो जाएगी?
नही, क्योंकि ये पावर तो सिर्फ और सिर्फ पूर्ण परमात्मा या उनके भेजे किसी संत के पास ही हो सकती है क्योंकि उनकी पावर खत्म नही होती।

हमें अपनी भलाई और वापिस सतलोक गमन जहां से हम सभी आये हैं वहां जाने के लिए ये पूंजी संजोकर रखनी होगी और पीढ़ी दर पीढ़ी चली आ रही परम्पराएं छोड़नी पडेगी ,सत्य साधना की खोज करनी होगी। और वो सत्य साधना आजकल बड़ी ही आसानी से उपलब्ध है।