सर्जिकल स्ट्राइक के बाद भारत पर बड़ा आतंकी हमला

सर्जिकल स्ट्राइक के बाद भारत पर बड़ा आतंकी हमला
ABP News 29 Nov. 2016 19:34

नई दिल्ली: जम्मू कश्मीर में डबल आतंकी हमला हुआ है. नगरोटा में आज तड़के आतंकियों ने सेना की टुकड़ी पर आत्मघाती हमला कर दिया. जम्मू के नगरोटा और सांबा में आतंकियों ने सुरक्षा बलों पर ये हमले किए.

नगरोटा में आतंकी सेना की यूनिट में घुसने की कोशिश कर रहे थे. मुठभेड़ में सेना के दो अधिकारियों समेत सात जवान शहीद हुए हैं. आतंकियों के निशाने पर नगरोटा हाइवे पर सेना की 16वीं कोर का मुख्यालय था. मुख्यालय के पास फिदायीन आतंकियों ने सुबह घात लगाकर सेना की टुकड़ी पर हमला किया. जवाबी कार्रवाई में चारों आतंकियों को भी ढेर कर दिया गया.

शहीद होने वाले जवानों में महाराष्ट्र के पंढरपुर के रहने वाले मेजर कुणाल गोसावी, नांदेड़ के रहने वाले लांसनायक संभाजी यशवंत कदम और सिपाही राघविंद्र शामिल हैं. अभी तक बाकी शहीद जवानों के बारे में जानकारी नहीं मिल पायी है.

वहीं दूसरी ओर सांबा के चमलियाल इलाके में बीएसएफ की पट्रोलिंग टीम को भी निशाना बनाया गया. इस हमले में तीन आतंकवादियों के मारे जाने की खबर है.

सांबा में हुए हमले में खास बात ये है कि जिस समय सुरक्षाबलों आतंकियों से मुकाबला करने में जुटे थे. ठीक उसी समय पाकिस्तान ने सीमा पार से गोलीबारी शुरू कर दी. पाक की ये नापाक हरकत साबित करती है कि इन कायराना आतंकी हरकतों में पाकिस्तान का हाथ शामिल है.

रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता मनीष मेहता ने बताया, “अंधेरे की वजह से फिलहाल ऑपरेशन रोक दिया गया है सुबह फिर सर्च ऑपरेशन शुरू किया जाएगा.” नगरोटा आतंकी हमले के बाद वैष्णो देवी मंदिर और उसके रास्ते की सुरक्षा कड़ी कर दी गई है. नगरोटा से कटरा की दूरी तीस किलोमीटर है, जहां से वैष्णो देवी यात्रा शुरु होती है.

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डर और भगवान

डर और भगवान 

नास्तिक लोग कहते रहते हैं कि जो पारिवारिक जिम्‍मेदारियों से भागता है या जो डरता है वह भगवान को मानता है । वो ही गुरू बनाता है । ये लोग सही फरमाते है । आज लगभग हर आदमी चाहे नास्तिक हो या आस्तिक, पारिवारिक जिम्‍मेदारियों निभाने के लिए छल कपट का सहारा ले रहा है । बडा ठग छोटे ठग को ठग रहा है । हॉ जी हम डरते है इसलिए ही तो हम भगवान को मानते है । हम डरते है, बेईमानी करने से, चौरी और नशा करने से , पाप करने से , डरते है किसी को धौका देने से, किसी का बुरा करने से । हम डरते हैं रिश्‍वत लेने से । हम डरते हैं परमात्‍मा के विद्धान से । आप चतुर हैं । आपके पास जैक चैक है हमारे पास सतनाम की कमाई है । आपका संया थानेदार तो आपको डर काहेका । आपके के साथ लठेत है हमारे साथ परमात्‍मा की शक्ति है । आपके मॉ बाप ही आपके गुरू हैं, आपको चाणक्‍य नीति सिखाई है, चालाकी सिखाई है । हमारे तो सतगुरू ही हमारे मॉ बाप है जिन्‍होनें हमे सत्‍यमार्ग बताया है। हम शरीफाई से जीना चाहते हैं लेकिन ये चतुर लोग गरीबों का हक छीनते हैं।



संतों वाणी है :- चतुर प्राणी चौर है, मुड मुगद ठोठ । 
ये नहीं संतों के काम के, इनके दे गल झोट ।।

ऐसे लोग ही तो कलयुग के रावण है कंस है । ये तो राम कृष्‍ण के हाथ मारे गये थे लेकिन इन निर्दयी लोगों से कौन जीते । कहते हैं नागा से तो भगवान भी डरता है तभी तो आपके भगवानों ने हाथ में हथियार लिए हुये हैं । ऐसे लोगों के विश्‍वासघात और अत्‍याचारों से तंग आकर कुछ तो डकेत बन जाते हैं जैसे फूलनदेवी डाकू बन गई थी। आप लोगों ने ही हमारे अन्‍दर डर बैठा दिया हैं हममें से बहुत से लोग भाग्‍यशाली है जो गलत रास्‍ते से बचकर सतगुरू की शरण में आ गये । 

एक बार एक संत ने प्रवचनों के दौरान मौहल्‍ले के लोगों से कहा कि जो लोग स्‍वर्ग जाना चाहते हैं वे हाथ उपर करे । सब ने हाथ उपर कर दिये । एक व्‍यक्ति ने हाथ उपर नहीं किये तो उससे संत ने पूछा भाई तुम स्‍वर्ग जाना क्‍यों नहीं चाहते हो इस पर वह व्‍यक्ति बोला गुरू जी यदि सब दुराचारी लोग स्‍वर्ग चले जायेगें तो हम जैसों को तो यह धरति यहीं स्‍वर्ग बन जायेगी । लेकिन महाराज जी ये लोग न तो बुराई छोडगें न ही स्‍वर्ग जा सकते हैं । संत जी बोले बेटा तू ठीक कहते हो जब तक आदमी तन मन से शुद्ध नहीं होता, अपने विकार नहीं छोडता तबतक उनको भगवान की प्राप्ति नहीं हो सकती है । ये पढे लिखे मूर्ख लोग 
संतों के ज्ञान को बकवास बताते है । 

कबीर, ज्ञानी हो तो ह्रदय लगाई । 
मूर्ख हो तो गम ना पाई ।। 

इच्‍छा रूपी खेलन आया । 
तातैं सुख सागर नहीं पाया ।। 

कृतध्‍नी भूले नर लोई । 
जा घट निश्‍चय नाम न होई ।।

सो नर कीट पतंग भुजंगा ।
चौरासी में धर है अंगा ।।

ऊंच होई के नीच सतावै । 
ताकर ओएल (बदला) मोही सों पावैं।।

गुरू बिन काहू न पाया ज्ञाना । 
ज्‍यों थोथा भुस छिडे किसाना ।। 

कबीर,तीन लोक पिंजरा भया, पाप पुण्‍य दो जाल । 
सभी जीव भेजन भये, एक खाने वाला काल ।। 

गरीब, एक पापी एक पुन्‍यी आया, एक है सूम दलेल रे । 
बिना भजन कोई काम नहीं आवै, सब हैं जम की जेल रे ।। 

इनको बिना ज्ञान के चौरासी खानी में भटकने का डर नहीं । लेकिन ये लोग कुछ भी कहे, इनको डर लगता है मौत से । लेकिन जो सतगुरू संत रामपाल जी महाराज की शरण में उनको मौत का डर कभी नहीं सताता है । 
कोई करके देखे सतभक्ति । 
आप डरे या न डरे एक बार ज्ञान गंगा पुस्‍तक अवश्‍य पढें । 
और रोज सुने सत्‍संग सायं 7.40 से 8.40 तक साधना चैनल पर अधिक जानीकारी हेतु देखे http://www.jagatgururampalji.org 

https://m.Facebook.com/thegreatchyrensatlokexpresdnewdthegreatchyrensatlokexpresdnews


बंदीछोड सतगुरू संत रामपाल दास जी महाराज की जय हो ।

तीसरे नाम (सारनाम) का महत्व

तीसरे नाम (सारनाम) का महत्व
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(सतनाम के बाद जब हम तीसरा सारनाम गुरू जी से लेते है तो गुरू जी सतनाम के दो अक्षर मे ही सारनाम का एक अक्षर एड कर देते है ऐसे ब्रह्म परब्रह्म पूर्णब्रह्म तीनो का जाप एक साथ करना होता है.. जाप विधि गुरू जी बताते है गीता अध्याय 17 के 23 मे लिखा है ओम- तत- सत ये पूर्ण परमात्मा का मंत्र(नाम) कहा है ओम सीधा ही है तत सत कोड वर्ड है सतगुरू रामपाल जी महाराज बतायेगे.. फिर इन तीनो मंत्र का एक साथ जाप करना होता है सतनाम और सारनाम एक नाम बन जाता है)

जब हम दसवे द्वार के last मे जाते है तो वहा काल वास्तविक रूप मे बैठा है.. वहा हम जब इन तीनो मंत्रो (सतनाम और सारनाम)का जाप एक साथ करते है तो काल निरंजन सर झुका देता है गीता 8/13 श्लोक मे ओम मंत्र काल ब्रह्म का है इसकी कमाई काल अपने पास रख लेता है और हमे आगे आठवे कमल ग्यारहवे द्वार मे जाने की अनुमति दे देता है. इसके सर के पीछे ग्यारहवा द्वार है. जब काल सर झुकाता है तो हम इसके सर पर पैर रख कर ग्यारहवे द्वार परब्रह्म के लोक आठवे कमल मे प्रवेश कर जाते है वहा हमारा सूक्ष्म शरीर छुट जाता है
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नाम लेने वाले व्यक्तियों कः लिए आवश्यक जानकारी

नाम लेने वाले व्यक्तियों के लिए आवश्यक जानकारी1. पूर्ण गुरु की पहचानसंत रामपाल जी महाराजआज कलियुग में भक्त समाज के सामने पूर्ण गुरु की पहचान करना सबसे जटिल प्रश्न बना हुआ है। लेकिन इसका बहुत ही लघु और साधारण–सा उत्तर है कि जो गुरु शास्त्रो के अनुसार भक्ति करता है और अपने अनुयाईयों अर्थात शिष्यों […]

अवश्य देखिए! इस वीडियो में दिखाई गयी हर फुटेज आप को झकझोर कर रख देगी

जरूर देखिये ये विडियो

इस वीडियो में दिखाई गयी हर फुटेज आप को झकझोर कर रख देगी,
हिन्दुस्तान की न्याय व्यवस्था, राजनिति और मिडिया के दागदार चेहरे को बेनकाब करती ये वीडियो, जो आपको अचम्भित कर देगी कि काले (जज) सफ़ेद (नेता) और खाकी( प्रशासन) लिबास पहने ये लोग क्या इतने दागदार हो चुके है–

"जींद में फ़िर गूंजेगी परमेश्वर वाणी "

“जींद में फ़िर गूंजेगी परमेश्वर वाणी ” 
परमेश्वर की असीम कृपा से जींद में मासिक सत्संग दिनांक 27 नवम्बर  2016 रविवार  को 10 बजे सवेरे कबीर अवतार  जगतगुरु तत्त्व दर्शी सन्त रामपाल जी महाराज की वाणी गूंजेगी अर्थात सत्संग होगा । भगत जन अधिक से अधिक पहुंचे। और जगत के लोगों को भी साथ लाएं ताकि परमेश्वर ज्ञान सुनकर अधिक से अधिक जीवात्माओं का उद्दार हो 
सम्पर्क :-
भक्त वजीर दास:-7056174881
दास ऐन.सी आर्य:935553
3965
भक्त सन्जीव दास:9355151251
स्थान :- वहीँ 
होटल दीप पैलेस  सफीदों रोड 
बाईपास जींद
(हरियाणा)
      🌻 सत् साहेब 🌻

जियो यूजर्स सावधान!

नई दिल्ली (टीम डिजिटल)। रिलांयस जियो यूजर्स को एक बड़ा झटका देने वाली खबर सामने आई, जिसे सुनकर शायद जियो का इस्तेमाल कर रहे लोग परेशानी में आ सकती है। दरअसल रिलांयस जियो के वेलकम ऑफर के तहत देशभर में करोड़ों लोग जियो सिम का इस्तेमाल फ्री में कर रहे हैं। लेकिन हाल ही में एक जियो यूजर उस समय हैरानी में पड़ गया जब उसके घर पर जियो का 27,000 रुपए से ज्यादा का बिल पहुंचा।
कोलकाता के रहने वाले युवक आयुनुद्दीन मोंदल 70xxxxx437 नंबर का इस्तेमाल कर रहे हैं और उन्हें ही जियो की ओर से एक 27,718 रुपए का बिल थमा दिया गया। इस तस्वीर में 27,718 रुपए को साफ तौर पर देखा जा सकता है।

इस पर यूजर का कहना है कि दिंसबर के अंत तक बिल 28,818 रुपए का हो जाएगा। जिसका मतलब करीब 1,100 रुपए की पेनल्टी होगी। जो की बहुत ज्यादा है।
लेकिन आप सब जानते हैं कि जियो ने अपने वेलकम ऑफर के तहत अनलिमिटेड वॉयस कॉल, अनलिमिटेड मैसेज और फ्री इंटरनेट जैसी सुविधा निशुल्क 31 दिंसबर तक दी है। जिसका मतलब है कि यह बिल एक दम झूठ है। यह सर्विस प्रोवाइडर की ओर से नहीं है। तो ऐसे में सभी जियो यूजर्स इस झूठे बिल के चलते परेशान न हो। इस मामले में फिलहाल रिलायंस जियो की ओर से कोई भी जानकारी नहीं आई है। यह बिल एक फेसबुक पेज पर देख गया था जो कि कोई ऑफिशियल नहीं था।

आधा किलो आटा – प्रेरणादायक कहानी

एक नगर का सेठ अपार धन सम्पदा का स्वामी था। एक दिन उसे अपनी सम्पत्ति के मूल्य निर्धारण की इच्छा हुई। उसने तत्काल अपने लेखा अधिकारी को बुलाया और आदेश दिया कि मेरी सम्पूर्ण सम्पत्ति का मूल्य निर्धारण कर ब्यौरा दीजिए, पता तो चले मेरे पास कुल कितनी सम्पदा है।
सप्ताह भर बाद लेखाधिकारी ब्यौरा लेकर सेठ की सेवा में उपस्थित हुआ। सेठ ने पूछा- “कुल कितनी सम्पदा है?” लेखाधिकारी नें कहा – “सेठ जी, मोटे तौर पर कहूँ तो आपकी सात पीढ़ी बिना कुछ किए धरे आनन्द से भोग सके इतनी सम्पदा है आपकी”
लेखाधिकारी के जाने के बाद सेठ चिंता में डूब गए, ‘तो क्या मेरी आठवी पीढ़ी भूखों मरेगी?’ वे रात दिन चिंता में रहने लगे। तनाव ग्रस्त रहते, भूख भाग चुकी थी, कुछ ही दिनों में कृशकाय हो गए। सेठानी द्वारा बार बार तनाव का कारण पूछने पर भी जवाब नहीं देते। सेठानी से हालत देखी नहीं जा रही थी। उसने मन स्थिरता व शान्त्ति के किए साधु संत के पास सत्संग में जाने को प्रेरित किया। सेठ को भी यह विचार पसंद आया। चलो अच्छा है, संत अवश्य कोई विद्या जानते होंगे जिससे मेरे दुख दूर हो जाय।
सेठ सीधा संत समागम में पहूँचा और एकांत में मिलकर अपनी समस्या का निदान जानना चाहा। सेठ नें कहा- “महाराज मेरे दुख का तो पार नहीं है, मेरी आठवी पीढ़ी भूखों मर जाएगी। मेरे पास मात्र अपनी सात पीढ़ी के लिए पर्याप्त हो इतनी ही सम्पत्ति है। कृपया कोई उपाय बताएँ कि मेरे पास और सम्पत्ति आए और अगली पीढ़ियाँ भूखी न मरे। आप जो भी बताएं मैं अनुष्ठान ,विधी आदि करने को तैयार हूँ”
संत ने समस्या समझी और बोले- “इसका तो हल बड़ा आसान है। ध्यान से सुनो सेठ, बस्ती के अन्तिम छोर पर एक बुढ़िया रहती है, एक दम कंगाल और विपन्न। उसके न कोई कमानेवाला है और न वह कुछ कमा पाने में समर्थ है। उसे मात्र आधा किलो आटा दान दे दो। अगर वह यह दान स्वीकार कर ले तो इतना पुण्य उपार्जित हो जाएगा कि तुम्हारी समस्त मनोकामना पूर्ण हो जाएगी। तुम्हें अवश्य अपना वांछित प्राप्त होगा।”
सेठ को बड़ा आसान उपाय मिल गया। उसे सब्र कहां था, घर पहुंच कर सेवक के साथ क्वीन्टल भर आटा लेकर पहुँच गया बुढिया के झोपडे पर। सेठ नें कहा- “माताजी मैं आपके लिए आटा लाया हूँ इसे स्वीकार कीजिए”
बूढ़ी मां ने कहा- “बेटा आटा तो मेरे पास है, मुझे नहीं चाहिए”
सेठ ने कहा- “फिर भी रख लीजिए”
बूढ़ी मां ने कहा- “क्या करूंगी रख के मुझे आवश्यकता नहीं है”
सेठ ने कहा- “अच्छा, कोई बात नहीं, क्विंटल नहीं तो यह आधा किलो तो रख लीजिए”
बूढ़ी मां ने कहा- “बेटा, आज खाने के लिए जरूरी, आधा किलो आटा पहले से ही मेरे पास है, मुझे अतिरिक्त की जरूरत नहीं है”
सेठ ने कहा- “तो फिर इसे कल के लिए रख लीजिए”
बूढ़ी मां ने कहा- “बेटा, कल की चिंता मैं आज क्यों करूँ, जैसे हमेशा प्रबंध होता है कल के लिए कल प्रबंध हो जाएगा” बूढ़ी मां ने लेने से साफ इन्कार कर दिया।
सेठ की आँख खुल चुकी थी, एक गरीब बुढ़िया कल के भोजन की चिंता नहीं कर रही और मेरे पास अथाह धन सामग्री होते हुए भी मैं आठवी पीढ़ी की चिन्ता में घुल रहा हूँ। मेरी चिंता का कारण अभाव नहीं तृष्णा है।
वाकई तृष्णा का कोई अन्त नहीं है। संग्रहखोरी तो दूषण ही है। संतोष में ही शान्ति व सुख निहित है।

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